उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sabz lafzon se aashnai hui

सब्ज़ लफ़्ज़ों से आश्नाई हुई

سبز لفظوں سے آشنائی ہوئی

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सब्ज़ लफ़्ज़ों से आश्नाई हुई
अब के पतझड़ में ये कमाई हुई

और फिर यूँ हुआ कि मर ही गई
एक ख़्वाहिश मिरी सताई हुई

दफ़्तर-ए-'इश्क़ का मुलाज़िम हूँ
मकतब-ए-इश्क़ में पढ़ाई हुई

राब्ता टूटना ही था लेकिन
ऐसे टूटा कि जग-हँसाई हुई

मैं ने हिन्दी के घर क़दम रक्खा
मेरी उर्दू से आश्नाई हुई

महवर-ए-हस्त-ओ-बूद टूट गया
ख़ाक तक ख़ाक की रसाई हुई