उर्दू शायरी · ग़ज़ल

lafz mein rang ki goyai hai

लफ़्ज़ में रंग की गोयाई है

لفظ میں رنگ کی گویائی ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

लफ़्ज़ में रंग की गोयाई है
दिल इसी रब्त का सौदाई है

मुझ में इक घर है जो आबाई है
इस के हर गोशे में तन्हाई है

सा-ए-गुल ही अमाँ देगा अब
सर पे जो धूप है सहराई है

मेरे अन्दर जो ख़ला है मौजूद
मेरे होने की पज़ीराई है

जिस में होते हैं सुबुक-दोश दरख़्त
मुझ को उस रुत की सदा आई है

मैं कहीं भी नहीं हूँ मंज़र में
ये मिरी ज़ात की पस्पाई है

देखिए कौन-सा मरहम उतरे
ज़ख़्म भर ज़ख़्म की गहराई है