उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nil-gun naw se utre hain hum

नील-गूँ नाव से उतरे हैं हम

نیلگوں ناؤ سے اترے ہیں ہم

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नील-गूँ नाव से उतरे हैं हम
मल्गजी घाट पे बैठे हैं हम

राख होता ही नहीं वो मंज़र
रोज़ चक़माक़ रगड़ते हैं हम

ज़ात उस की है कलीदी गोया
उस से मिलते हैं तो खुलते हैं हम

आबला फूटता है जैसे कोई
बैन करते हुए हँसते हैं हम

ध्यान हम से न हटा कूज़ा-गर
बनते बनते ही बिगड़ते हैं हम

बस यही राब्ता बाक़ी है अब
एक ही शह्र में रहते हैं हम

सब्ज़ क़िरअत की ज़रूरत है जिन्हें
हाँ वही ज़र्द नविश्ते हैं हम