उर्दू शायरी · ग़ज़ल

tassur dhup ka baDhte hue dekh

तअस्सुर धूप का बढ़ते हुए देख

تأثر دھوپ كا بڑھتے ہوئے دیکھ

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

तअस्सुर धूप का बढ़ते हुए देख
धनक के रंग सब फीके हुए देख

सभी सम्तों से आते शोर को सुन
ज़मीं पर आसमाँ गिरते हुए देख

कभी सुन चाक से उठती हुई धुन
कभी पैकर कोई बनते हुए देख

कभी मरकूज़ भी कर ध्यान अपना
कभी ख़ुद में मुझे आते हुए देख

पवन-पाज़ेब की झंकार को सुन
शजर को वज्द में आते हुए देख

फ़राग़त से किसी दिन घाट पर आ
नदी में रौशनी घुलते हुए देख

कभी सुन तीरगी के क़हक़हों को
चराग़-ए-शब कभी बुझते हुए देख