उर्दू शायरी · ग़ज़ल

rut ke labon par koi dua bhi nahin hai

रुत के लबों पर कोई दु'आ भी नहीं है

رت کے لبوں پر کوئی دعا بھی نہیں ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

रुत के लबों पर कोई दु'आ भी नहीं है
और दरख़्तों को कुछ गिला भी नहीं है

ज़िक्र करें और बार-बार करें हम
हिज्र कोई ऐसा वाक़ि'आ भी नहीं है

ख़ैर-ख़बर क्या हो मुझ को शाम-ए-तरब की
मेरा तो उस से मुकालिमा भी नहीं है

लौट रहा हूँ उसी की सम्त बहर-हाल
शह्र जो मुझ को पुकारता भी नहीं है

मेरी तरह कौन बे-सुख़न है यहाँ 'राज़'
मेरी तरह कोई लब-कुशा भी नहीं है