उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho ke bedar kaun dekhega

हो के बेदार कौन देखेगा

ہو کے بیدار کون دیکھے گا

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो के बेदार कौन देखेगा
शब के उस पार कौन देखेगा

गामज़न इस सफ़र में बस मैं हूँ
मेरी रफ़्तार कौन देखेगा

किस की नज़रों में बर्क़ चमकेगी
धुंध के पार कौन देखेगा

सर ख़मीदा हैं लोग महफ़िल में
मेरा इंकार कौन देखेगा

जब मुझे नींद आ रही होगी
आख़िरी बार कौन देखेगा

तू न देखेगा आसमाँ से अगर
तेरा संसार कौन देखेगा

क़हत जब रौशनी का होगा 'राज़'
नूर या नार कौन देखेगा