उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mere jawab pe phir se sawal hota hua

मिरे जवाब पे फिर से सवाल होता हुआ

مرے جواب پہ پھر سے سوال ہوتا ہوا

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मिरे जवाब पे फिर से सवाल होता हुआ
फ़ुज़ूल बहस में इक सच हलाल होता हुआ

मैं ख़ुश्क मौसमों से बर्शगाल होता हुआ
वो हिज्र-हिज्र बदन फिर विसाल होता हुआ

किसी के अश्क समुंदर से होड़ लेते हुए
किसी का चेहरा हँसी से गुलाल होता हुआ

निगल रहा है मुझे फिर से अंदरून मिरा
दयार-ए-हब्स का 'ओहदा बहाल होता हुआ

उदासियों की फ़ज़ा दिल पे राज करती हुई
ख़ुशी की बात पे अक्सर मलाल होता हुआ

बदन-धनक में नए रंग हो रहे हैं वरूद
वो हम-सुख़न से मिरा हम-ख़याल होता हुआ