उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bosida kitab mein mila tha

बोसीदा किताब में मिला था

بوسیدہ کتاب میں ملا تھا

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बोसीदा किताब में मिला था
वो लफ़्ज़ जो मुझ से खो गया था

इक पार्क में लोग हँस रहे थे
मैं और उदास हो गया था

होश आता समा'अतों को जब तक
आवाज़ का क़हत पड़ चुका था

तस्वीर नहीं थी रंग था वो
जो आँख में एक दम चुभा था

फिर नींद के दश्त में खड़ा हूँ
वो ख़्वाब यहीं कहीं गिरा था

इस तरह खुला था वो अब्र मुझ पर
मैं ख़ाक से रंग हो गया था

मरता है कोई इतनी जल्दी
वो शख़्स बड़ा उतावला था