उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wasl ki raat se bhi pyara din

वस्ल की रात से भी प्यारा दिन

وصل کی رات سے بھی پیارا دن

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वस्ल की रात से भी प्यारा दिन
मेरे नज़दीक सुख़न-आरा दिन

लफ़्ज़ की तेग़ बड़ी काम आई
आख़िरश कट ही गया सारा दिन

कोई मनहूस ख़बर है शायद
सर-निगूँ आया है हरकारा दिन

आतिश-ए-ज़ात में महफ़ूज़ रहा
इक ठिठुरता हुआ अँधियारा दिन

वक़्त का देवता ख़ुश है इस पर
माँग लेगा मुझे बंजारा दिन

ये रिवायत है क़बीले की मिरे
मैं ने इक शाम पे है वारा दिन