उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt uDne ka hai girwi baal-o-par kyunkar rakhen

वक़्त उड़ने का है गिरवी बाल-ओ-पर क्यूँकर रखें

وقت اڑنے کا ہے گروی بال و پر کیوں کر رکھیں

शायर: Rafia Zainab5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त उड़ने का है गिरवी बाल-ओ-पर क्यूँकर रखें
हम हैं फ़ितरत से मुसाफ़िर कोई घर क्यूँकर रखें

जब ज़रूरत थी किसी शाने की हम को न मिला
अब मिला तो सोचते हैं उस पे सर क्यूँकर रखें

वक़्त ख़ुद इक राहज़न है ज़िंदगी की राह में
पास अपने इश्क़ सा लाल-ओ-गुहर क्यूँकर रखें

जब तलक है साँस हम को ज़ख़्म खाने और हैं
एक ग़म की याद में फिर चश्म-ए-तर क्यूँकर रखें

तुझ को पा लें या कि खो दें है ज़ियाँ दोनों तरह
फिर भला ऐ जान-ए-जाँ तेरी ख़बर क्यूँकर रखें