उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aao har yar-e-guzishta ko bulaya jae

आओ हर यार-ए-गुज़िश्ता को बुलाया जाए

آؤ ہر یار گزشتہ کو بلایا جائے

शायर: Rafia Zainab5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आओ हर यार-ए-गुज़िश्ता को बुलाया जाए
दिल की हालत का तमाशा सा बनाया जाए

शाख़ से हो के जुदा गुल पे तिरे क्या गुज़री
बाग़बाँ को ये किसी रोज़ बताया जाए

सूरत-ए-ज़र्द को पढ़ चाक-ए-गरेबाँ को समझ
क्या ज़रूरी है कि हर ज़ख़्म दिखाया जाए

मुझ को इस अहद-ए-मोहब्बत से शिकायत ये है
इस में जो लफ़्ज़ हमेशा है हटाया जाए

अब कुएँ भी कहाँ मौजूद हैं इन शहरों में
किस तरह सुन्नत-ए-अल्वी को निभाया जाए