उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum ko itna hi bas ghanimat hai

हम को इतना ही बस ग़नीमत है

ہم کو اتنا ہی بس غنیمت ہے

शायर: Rafia Zainab6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम को इतना ही बस ग़नीमत है
ना सही इश्क़ पर इनायत है

दिल को इंकार है मोहब्बत से
और इस का सबब मोहब्बत है

हम भले जान हार बैठे हों
उस को इक दोस्त की ज़रूरत है

कुछ नहीं है गिला हमें उस से
ज़िंदगी से बहुत शिकायत है

अपनी ख़ातिर ज़रा नहीं फ़ुर्सत
उस की ख़ातिर बड़ी फ़राग़त है

इस ग़ज़ल में फ़क़त है हिज्र-ओ-विसाल
इस में कुछ भी नहीं बलाग़त है