उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahshat sada-e-dasht hai wahshat qaba-e-dasht

वहशत सदा-ए-दश्त है वहशत क़बा-ए-दश्त

وحشت صدائے دشت ہے وحشت قبائے دشت

शायर: Danish Hayat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहशत सदा-ए-दश्त है वहशत क़बा-ए-दश्त
मुझ पर किसी की याद ने क्या क्या बनाए दश्त

मुझ पर किसी का हिज्र मुसलसल न कीजियो
या-रब्ब-ए-ज़ुल-जलाल मिरे ऐ ख़ुदा-ए-दश्त

मजनूँ को देख मेरे दुवारे पे आ गया
कासा उठा के कहता है वहशत बरा-ए-दश्त

जैसे किसी की साँस उखड़ती हुई लगे
जैसे किसी को रास न आए हवा-ए-दश्त

तुझ पर जो नींद ख़्वाब का दोहरा 'अज़ाब है
तो क्यों न तुझ पे फूँक दूँ पढ़ कर दु'आ-ए-दश्त