उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahshat ki baat ho to bila-shak farid hain

वहशत की बात हो तो बिला-शक फ़रीद हैं

وحشت کی بات ہو تو بلا شک فرید ہیں

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वहशत की बात हो तो बिला-शक फ़रीद हैं
पर इश्क़ में तो क़ैस जी मेरे मुरीद हैं

नफ़रत के बीहड़ों को हमारे लहू से सींच
हम लोग जंग-ए-इश्क़ के अंतिम शहीद हैं

इन का मुताले’आ है मियाँ शर्त-ए-दीन-ए-इश्क़
ये होंटों के निशान कलाम-ए-मजीद हैं

मुझ को यक़ीं दिलाना है तो रूह बन के मिल
ये हुस्न-ओ-जिस्म इश्क़ की कच्ची रसीद हैं

क्या है कोई उमीद कि हम को पता चले
हम लोग एक उम्र से क्यों ना-उमीद हैं

हम आने वाली नस्ल को देंगे शदीद प्यास
हम लोग ज़ेर-ए-बै'अत-ए-फ़िक्र-ए-यज़ीद हैं