उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek taswir pe khinch rakhe hain tu ne kitne rang ke dukh

इक तस्वीर पे खींच रखे हैं तू ने कितने रंग के दुख

اک تصویر پہ کھینچ رکھے ہیں تو نے کتنے رنگ کے دکھ

शायर: Vikram7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक तस्वीर पे खींच रखे हैं तू ने कितने रंग के दुख
मेरे मुसव्विर तुझ से बने नई लेकिन मेरे ढंग के दुख

यार तिरी वो नसरी चिंता तू ने सुनाई सब ने सुनी
कौन सुनेगा जब मैं छेड़ूँगा अपने आहंग के दुख

इश्क़-ओ-जुनूँ की जंग हुई कल रात बदन के मैदाँ में
दिल को आज मनाने होंगे बीती रात की जंग के दुख

क़िस्मत की हर थाप को मैं संगीत बनाऊँ तू गाए
तक-धन-ता की धुन पर रक़्स करें फिर मुझ मिर्दंग के दुख

जैसे इक सय्याद की आहट पा कर पंछी हो गए फुर
तेरी एक छुअन भर से काफ़ूर हुए अंग अंग के दुख

प्यासी जोगन धरती की सिसकी सुन कर रम हो न सका
फिर तो झमाझम टूट के बरसे बादल मस्त मलंग के दुख

फिर वही ख़्वाब की ख़ुशबू है वही सहरा है पर थक गए हम
यार शिकारी तीर चला अब हर ले इस सारंग के दुख