उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dariya ki dastaras mein rawani ke sath sath

दरिया की दस्तरस में रवानी के साथ साथ

دریا کی دسترس میں روانی کے ساتھ ساتھ

शायर: Vikram6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरिया की दस्तरस में रवानी के साथ साथ
इक प्यास जन्म लेती है पानी के साथ साथ

हम जैसे इश्क़-ज़ाद बने मिट्टियों से जब
गूंधी गई थी आग भी पानी के साथ साथ

सहरा-नवर्द है पे जुनूनी नहीं रहा
गुम हो गया वो शख़्स जवानी के साथ साथ

तहरीर करना है तो मिरे साथ इश्क़ लिख
मतरूक लफ़्ज़ लिखते हैं मा'नी के साथ साथ

कैसी अजीब जंग लड़े जा रहे हैं हम
ख़ुद भी खड़े हैं दुश्मन-ए-जानी के साथ साथ

किरदार मरकज़ी हूँ मैं इस ट्रैजडि का सो
होना है मुझ को ख़त्म कहानी के साथ साथ