उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun ki dhup rahegi abhi zamane tak

जुनूँ की धूप रहेगी अभी ज़माने तक

جنوں کی دھوپ رہے گی ابھی زمانہ تک

शायर: Vikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनूँ की धूप रहेगी अभी ज़माने तक
ज़मीन-ए-ख़्वाब-ओ-ख़यालाँ के रस्मसाने तक

दिनों में ख़्वाब हमीं देखते थे दीवाने
ख़ुद अपनी पीठ हमीं लाए ताज़ियाने तक

फिर एक ख़्वाब ने रस्ता हमारा रोक लिया
पहुँचने वाले थे हम नींद के ख़ज़ाने तक

ये किस के ख़्वाब हमारी पलक पे रक्खे हैं
ये किस ने नींद उतारी हमारे शाने तक

ये ख़्वाब देखना मुझ को बहुत ज़रूरी है
मैं जागने का नहीं मौत के जगाने तक