उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ilaj-e-gham wo paiham kar rahe hain

इलाज-ए-ग़म वो पैहम कर रहे हैं

علاج غم وہ پیہم کر رہے ہیں

शायर: Vikram5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इलाज-ए-ग़म वो पैहम कर रहे हैं
मिरे ग़म-ख़्वार मातम कर रहे हैं

है इक गिर्दाब के मरकज़ पे दुनिया
हम अपनी आँख भर नम कर रहे हैं

हम अपने आप से नाराज़ रह कर
किसी का बोझ कुछ कम कर रहे हैं

ख़ुदा के काम हैं सच पूछिए तो
जिन्हें हम इब्न-ए-आदम कर रहे हैं

हमारी ख़ाक माँगी जा रही है
जुनूँ शायद मुजस्सम कर रहे हैं