उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil-e-viran ka sani nahin hai

दिल-ए-वीरान का सानी नहीं है

دل ویران کا ثانی نہیں ہے

शायर: Vikram7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल-ए-वीरान का सानी नहीं है
किसी में ऐसी वीरानी नहीं है

दरून-ए-हल्क़ा-ए-गिर्दाब हैं हम
पर इन आँखों में तुग़्यानी नहीं है

यहाँ ये कौन सच-मुच हँस रहा है
भला किस में पशेमानी नहीं है

है दिल की रेत पर फैली मोहब्बत
ये वो पानी है जो पानी नहीं है

उसे जाना ही था इक दिन अचानक
मुझे बिल्कुल भी हैरानी नहीं है

ये गिर्या है मिरी आदत में शामिल
मुझे कोई परेशानी नहीं है

बदन के साथ ही मिट जाएँगे सब
कोई भी दर्द ला-फ़ानी नहीं है