उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi hai rut aur wahi faza hai

वही है रुत और वही फ़ज़ा है

وہی ہے رت اور وہی فضا ہے

शायर: Vikas Sharma Raaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही है रुत और वही फ़ज़ा है
चराग़-ए-सरमा बुझा हुआ है

न हम-सफ़र है न हम-नवा है
सफ़र भी इस बार दूर का है

मैं देख कर जिस को डर रहा था
वो साया मुझ से लिपट गया है

तमाम रंगों से भर के मुझ को
वो शख़्स तस्वीर हो गया है

यूँ एक टुक देखना ख़ला में
उदास होने की इब्तिदा है

अभी टहलते रहो गली में
अभी दरीचा खुला हुआ है

चलो कि दरिया निकालते हैं
उठो कि सहरा पुकारता है