उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wahi gardish wahi mehwar hamara

वही गर्दिश वही महवर हमारा

وہی گردش وہی محور ہمارا

शायर: Vikas Sharma Raaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वही गर्दिश वही महवर हमारा
वही सय्यारगाँ से डर हमारा

तख़य्युल-साज़ है ये अब्र-ए-ज़ुल्मत
दरख़्शाँ हो गया बंजर हमारा

अभी तो शाम की दस्तक हुई है
अभी से लग गया बिस्तर हमारा

यही तन्हाई है जन्नत हमारी
इसी जन्नत में है अब घर हमारा

कोई छुट्टी नहीं कार-ए-सुख़न में
खुला रहता है ये दफ़्तर हमारा

सुकूत-ए-शाम इक गिर्ये से टूटा
निशाने पर लगा पत्थर हमारा