उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uncha uDne ka bhi arman abhi baqi hai

ऊँचा उड़ने का भी अरमान अभी बाक़ी है

اونچا اڑنے کا بھی ارمان ابھی باقی ہے

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऊँचा उड़ने का भी अरमान अभी बाक़ी है
पर तो काटे गए पर जान अभी बाक़ी है

हादसों से अभी टूटा नहीं रिश्ता मेरा
दिल में उठता है जो तूफ़ान अभी बाक़ी है

तुम जो कहते हो कि दुनिया को ख़रीदोगे मगर
बिक नहीं सकता जो इंसान अभी बाक़ी है

हट सके कैसे बुराई कि इसी दुनिया में
शर अभी ज़िंदा है शैतान अभी बाक़ी है

यूँ तो पहचान चुका सारे जहाँ को 'आग़ाज़'
ख़ुद से लेकिन मिरी पहचान अभी बाक़ी है