उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use talab thi lihaza bana ke chhoD diya

उसे तलब थी लिहाज़ा बना के छोड़ दिया

اسے طلب تھی لہٰذا بنا کے چھوڑ دیا

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे तलब थी लिहाज़ा बना के छोड़ दिया
मिरे जुनूँ को तमाशा बना के छोड़ दिया

मैं ख़ुद को क़िस्तों में पूरा बना रहा हूँ अब
ख़ुदा ने मुझ को तो आधा बना के छोड़ दिया

बदन का रूह से झगड़ा बहुत पुराना है
इसे हवस का 'इलाक़ा बना के छोड़ दिया

मलाल इस का नहीं ग़ैर हो गया अब वो
मलाल ये है कि अपना बना के छोड़ दिया

बरत रहा है यहाँ जिस को जो ज़रूरत है
हमारे हाथ ने कितना बना के छोड़ दिया