उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab charaghon mein teri yaad jalata hua main

अब चराग़ों में तिरी याद जलाता हुआ मैं

اب چراغوں میں تری یاد جلاتا ہوا میں

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब चराग़ों में तिरी याद जलाता हुआ मैं
हिज्र को वस्ल की ता'बीर बनाता हुआ मैं

इक उदासी के जज़ीरे पे चला जाता हूँ
इक तबस्सुम को कहीं हाथ लगाता हुआ मैं

रंग-ए-इम्काँ की ग़ज़ब शक्ल में ढल जाता हूँ
अपनी मिट्टी के लिए चाक घुमाता हुआ मैं

हादसे टालने से क्यों नहीं टलते हैं यहाँ
ख़ुद से टकरा गया हूँ आँख बचाता हुआ मैं

सब को इक हाथ से ख़ैरात दिए जाता हूँ
दूसरे हाथ में कश्कोल उठाता हुआ मैं