उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib mauj-e-junun par sawar ho gaya tha

'अजीब मौज-ए-जुनूँ पर सवार हो गया था

عجیب موج جنوں پر سوار ہو گیا تھا

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजीब मौज-ए-जुनूँ पर सवार हो गया था
फिर उस के बा'द मैं बे-इख़्तियार हो गया था

मिरे वुजूद में फिर इश्तिहार लगने लगे
कि दफ़'अतन कोई मुझ में फ़रार हो गया था

उस एक हुस्न की आमद हुई थी आँखों में
मिरा धड़कता हुआ दिल ग़ुबार हो गया था

निशाना मुझ पे लगा है फ़क़त मिरे दिल का
जहाँ के तीर से तो होशियार हो गया था

लगा था पहली नज़र में सभी को मैं मुबहम
दुबारा देखने पर आश्कार हो गया था