उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baatin se mere usko sarokar bahut hai

बातिन से मिरे उस को सरोकार बहुत है

باطن سے مرے اس کو سروکار بہت ہے

शायर: Balwan Singh Azar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बातिन से मिरे उस को सरोकार बहुत है
वो एक बदन मेरा तलबगार बहुत है

आती है मुसलसल कोई मानूस सी आवाज़
एक तुरफ़ा-तमाशा पस-ए-दीवार बहुत है

सहरा की तरफ़ यूँही नहीं आता कोई पाँव
मजनूँ तिरी ज़ंजीर में झंकार बहुत है

बस याद किए जाता हूँ घर-बार को 'आज़र'
बाज़ार से निकलूँ तो ये दुश्वार बहुत है