उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni mehnat se bahut log kamae hue hain

अपनी मेहनत से बहुत लोग कमाए हुए हैं

اپنی محنت سے بہت لوگ کمائے ہوئے ہیں

शायर: Balwan Singh Azar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी मेहनत से बहुत लोग कमाए हुए हैं
ज़िंदगी हम तिरे मज़दूर हैं छाए हुए हैं

तेरी जानिब भी हमें फ़ासले तय करने पड़े
अपनी जानिब भी कहीं दूर से आए हुए हैं

शहर माँगेगा तो ता'बीर भी ला देंगे हम
ये नए ख़्वाब हमारे ही दिखाए हुए हैं

कैसी रुत थी कि वो तब भूल गए थे सब कुछ
कैसी रुत है कि हमीं ध्यान में लाए हुए हैं

इक ज़रा सा तो सफ़र है मगर इन लोगों ने
कैसे कैसे सर-ओ-सामान उठाए हुए हैं