उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use KHabar hi nahin thi wo kis jahan mein tha

उसे ख़बर ही नहीं थी वो किस जहान में था

اسے خبر ہی نہیں تھی وہ کس جہان میں تھا

शायर: Aarib Hashmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे ख़बर ही नहीं थी वो किस जहान में था
खुली फ़ज़ा थी परिंदा खुली उड़ान में था

उसे मैं देख रहा हूँ तुम्हारे सीने में
वो एक तीर जो अब तक मिरी कमान में था

सो उस की जान बचानी बहुत ज़रूरी थी
भले वो भाग के आया मिरी अमान में था

कि नाव थकने लगी थी हवा से लड़ते हुए
मगर वो हौसला बाक़ी जो बादबान में था

कोई तो बात निकलनी थी बात करने से
कोई तो राब्ता दोनों के दरमियान में था

उसे पता ही नहीं था ये रतजगा क्या है
मुझे ख़बर ही नहीं थी मैं इम्तिहान में था

किसी की बात से मुझ को यक़ीं मिला 'आरिब'
वही यक़ीन जो अब तक मिरे गुमान में था