उर्दू शायरी · ग़ज़ल

use bhi kya achchha lagta hun

उसे भी क्या अच्छा लगता हूँ

اسے بھی کیا اچھا لگتا ہوں

शायर: Umar Farhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उसे भी क्या अच्छा लगता हूँ
मैं जिस के सपने तकता हूँ

मिरे साथ इक साया चलता है
भीड़ में जब आगे बढ़ता हूँ

उन में कोई भी अपना नहीं है
मैं जिन चेहरों को पढ़ता हूँ

औरों का अब ज़िक्र नहीं है
अपने आप पे ख़ुद हँसता हूँ

अब दुनिया जैसी भी हो 'फ़रहत'
मैं बंद आँखों से तकता हूँ