उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usne ek bar kaha dekh ke chal pani mein

उस ने इक बार कहा देख के चल पानी में

اس نے اک بار کہا دیکھ کے چل پانی میں

शायर: Nadeem Malik7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस ने इक बार कहा देख के चल पानी में
देखते देखते सब हो गए हल पानी में

इतना कोमल है कि छूने से बिखर जाएगा
ताज़ा ताज़ा अभी निकला है कँवल पानी में

ये मिरा जिस्म है जलता हुआ इस जिस्म को आज
पाँव से रौंद और हाथों से कुचल पानी में

आख़िरी बार तुझे छू के ये महसूस किया
आग लग सकती है इस बार सँभल पानी में

कैसे मुमकिन है मिरे दोस्त मिरे गिर्या-गुज़ार
आज में से ही निकल आएगा कल पानी में

ये मिरे प्यार की है आख़िरी तस्वीर सँभाल
टूट जाए न कहीं देख के चल पानी में

जो तुम्हें देख रहा है अभी छुप-छुप के 'नदीम'
एक दिन आएगा वो ले के ग़ज़ल पानी में