उर्दू शायरी · ग़ज़ल

usko KHalwat ka meri pas nahin

उस को ख़ल्वत का मेरी पास नहीं

اس کو خلوت کا میری پاس نہیں

शायर: Saa’in Alig10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस को ख़ल्वत का मेरी पास नहीं
कैसे कह दूँ कि जी उदास नहीं

ना-शनासा कोई अगर हो भी
मेरे नालों से ना-शनास नहीं

क्या हुआ ग़म के पासदारों को
किस लिए महव-ए-हुज़्न-ओ-यास नहीं

चाहता हूँ जिसे क़रीब अपने
इक वही शख़्स मेरे पास नहीं

बरसर-ए-बज़्म है वो जल्वा-नुमा
हैफ़ उस को हया का पास नहीं

ख़ून को ख़ून जो नहीं कहते
ऐसे लोगों से कोई आस नहीं

गालियाँ भी नहीं क़ुबूल उन्हें
और 'इज़्ज़त भी उन को रास नहीं

साक़िया जाम उसी को देता है
क़तरा भर की भी जिस को प्यास नहीं

कौन हम सा मलूल है जग में
जुज़ मलाल अपनी कुछ असास नहीं

बा'द 'साइन' के इतना याद रहे
कोई 'आशिक़ का ग़म-शनास नहीं