उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil dukhao na barha jaanan

दिल दुखाओ न बारहा जानाँ

دل دکھاؤ نہ بارہا جاناں

शायर: Saa’in Alig9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल दुखाओ न बारहा जानाँ
मुँह छुपाओ न बारहा जानाँ

मैं तुम्हारा हूँ बस तुम्हारा हूँ
आज़माओ न बारहा जानाँ

ख़ुद ही रूठा हूँ ख़ुद ही मानूँगा
तुम मनाओ न बारहा जानाँ

जाँ सँभलने तो दो किसी लम्हे
याद आओ न बारहा जानाँ

मेरी ग़ज़लों से सब शनासा हैं
गुनगुनाओ न बारहा जानाँ

कुछ सबक़ भी तो लो हवादिस से
चोट खाओ न बारहा जानाँ

एक हालत में मुझ को रहने दो
आओ जाओ न बारहा जानाँ

इक तबस्सुम ही जान-लेवा है
मुस्कुराओ न बारहा जानाँ

जिस कहानी में मर गया 'साइन'
वो सुनाओ न बारहा जानाँ