उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bichhaD kar ab zara aazar khincho

बिछड़ कर अब ज़रा आज़ार खींचो

بچھڑ کر اب ذرا آزار کھینچو

शायर: Saa’in Alig6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बिछड़ कर अब ज़रा आज़ार खींचो
तुम अपने दिल में इक दीवार खींचो

भला लोगों से कैसा डर चलो भी
कोई दामन सर-ए-बाज़ार खींचो

हयात अपनी सफ़र है इक मुसलसल
उठो पैरों से अपने ख़ार खींचो

मोहब्बत जिस तरह चाहो जताओ
मगर ये क्या मिरे रुख़्सार खींचो

मिरे हाथों में गुल हैं और फ़क़त गुल
मिरे यारो न तुम तलवार खींचो

अरे 'साइन' नशे से फ़ैज़ पाओ
चलो वाइज़ की अब दस्तार खींचो