उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kar kar ke qaid mujhko wo sayyaad rah gaya

कर कर के क़ैद मुझ को वो सय्याद रह गया

کر کر کے قید مجھ کو وہ صیاد رہ گیا

शायर: Saa’in Alig6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कर कर के क़ैद मुझ को वो सय्याद रह गया
मैं था असीर-ए-रंज सो आज़ाद रह गया

सीने से एक तीर तो निकला है जिस तरह
उस ने मगर किया था जो इरशाद रह गया

मैं ने कहा कि वज़्न को जांचो ज़रा ब-ग़ौर
कहने लगा कि जी मिरे उस्ताद रह गया

अपनी ख़िरद पे होता है मुझ को मलाल यूँ
जो भूलना था मुझ को वही याद रह गया

साबिर हो कोई मुझ सा तो मुझ को दिखाओ भी
पहलू में मेरे तेशा-ए-फ़र्हाद रह गया

'साइन' दिल-ए-ख़राब की बातों में आन के
सहरा में जा मिली न घर आबाद रह गया