उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekh ab to mera dushman bhi kahe kya baat hai

देख अब तो मेरा दुश्मन भी कहे क्या बात है

دیکھ اب تو میرا دشمن بھی کہے کیا بات ہے

शायर: Saa’in Alig6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देख अब तो मेरा दुश्मन भी कहे क्या बात है
अब तो मेरे पास आ कर पूछ ले क्या बात है

बस इसी हसरत के चलते मैं तो हूँ शा'इर बना
मैं सुनाऊँ शे'र उस को वो कहे क्या बात है

इस क़दर ये मेहरबानी इन दिनों मुझ पे ख़ुदा
मिल रहे हैं बिन दु'आ ही ग़म मुझे क्या बात है

ऐ मसीहा तेरे हाथों की शिफ़ा को क्या हुआ
तेरे होते ज़ख़्म मेरे हैं हरे क्या बात है

तुम तो कहते थे कि मेरे क़ुर्ब में है इक सुकूँ
आज क्यों हैं दरमियाँ ये फ़ासले क्या बात है

आज 'साइन' याद करते हैं मुझे अहबाब क्यों
सोचता हूँ पूछ लूँ किस काम से क्या बात है