उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hosh tha ya koi KHumar raha

होश था या कोई ख़ुमार रहा

ہوش تھا یا کوئی خمار رہا

शायर: Saa’in Alig7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

होश था या कोई ख़ुमार रहा
दिल कि बेताब-ओ-बे-क़रार रहा

उन के पहलू में जा छुपा आख़िर
दिल पे हम को न इख़्तियार रहा

लाख चाहा कि मुंजमिद होता
हैफ़ दिल महव-ए-इंतिशार रहा

दिल को धड़का था इस रिफ़ाक़त में
ज़हे क़िस्मत कि यार यार रहा

उन के पहलू में जी परेशाँ है
ये क़लक़ हम को बार बार रहा

चंद लम्हों का वस्ल था और फिर
देर तक उन का इंतिज़ार रहा

हिज्र में इक सुकूँ तो है 'साइन'
वस्ल में कब किसे क़रार रहा