उर्दू शायरी · ग़ज़ल

uski yaadon ko kabhi dil se nikala na gaya

उस की यादों को कभी दिल से निकाला न गया

اس کی یادوں کو کبھی دل سے نکالا نہ گیا

शायर: Om Awasthi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उस की यादों को कभी दिल से निकाला न गया
सब्ज़ डाली थी जहाँ पेड़ वो काटा न गया

हिज्र में हम ने तिरे ख़ूब ग़ज़ल लिख डाली
बेवफ़ाई का ये एहसान भुलाया न गया

तेरे होने का मुझे अब भी भरम होता है
जिस्म से दूर कभी जैसे की साया न गया

रात तन्हाई में दो लोग जगे रहते है
हिज्र वाले या जिन्हें हिज्र में डाला न गया

हर घड़ी सोच में इक बात यही रहती है
बेवफ़ा थे या मिरा इश्क़ सँभाला न गया

दिल के सब द्वार तेरे बाद लगा रखे है
तेरे कमरे को तिरे बाद बिगाड़ा न गया