उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dilon ke darmiyan jis waqt ye zamana paDa

दिलों के दरमियाँ जिस वक़्त ये ज़माना पड़ा

دلوں کے درمیاں جس وقت یہ زمانا پڑا

शायर: Om Awasthi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिलों के दरमियाँ जिस वक़्त ये ज़माना पड़ा
दयार-ए-इश्क़ से बाहर निकल के आना पड़ा

किसी को हक़ था जहाँ चाहे रास्ता बदले
किसी को उम्र तलक राब्ता निभाना पड़ा

पसीना हम ने बहाया न जंग से पहले
तभी तो हम को लहू जंग में बहाना पड़ा

कोई समझता मिरे दिल की कैफ़ियत उस पल
तुम्हारा अक्स रह-ए-दिल से जब मिटाना पड़ा

किसे ख़बर कि सुकूँ की तलाश में हम को
हयात-ए-फ़ानी में कितनों से दिल लगाना पड़ा