उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is se pahle ki mera zehn sanbhaale mujhko

इस से पहले कि मेरा ज़ेहन सँभाले मुझ को

اس سے پہلے کہ میرا ذہن سنبھالے مجھ کو

शायर: Om Awasthi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस से पहले कि मेरा ज़ेहन सँभाले मुझ को
ये तिरी सादा-दिली मार न डाले मुझ को

नींद कर देती है ख़्वाबों के हवाले मुझ को
बंद आँखों से भी दिखते हैं उजाले मुझ को

मुंतज़िर हूँ वो किसी तौर मुझे याद करे
फेसबुक में ही सही ढूँड निकाले मुझ को

देखता हूँ बड़ी उम्मीद से दुनिया की तरफ़
मौसम-ए-हिज्र से कोई तो बचा ले मुझ को

एक दिन तुझ को दिखाऊँगा मैं दिन में तारे
तब तलक ज़िंदगी चाहे तो नचा ले मुझ को