उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek nadi ki dhaar ka le kar sahaara aa gae

इक नदी की धार का ले कर सहारा आ गए

اک ندی کی دھار کا لے کر سہارا آ گئے

शायर: Om Awasthi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक नदी की धार का ले कर सहारा आ गए
सारी दुनिया घूम के तुझ तक दोबारा आ गए

क्यों अचानक नींद इन आँखों से ग़ाएब हो गई
आप ख़्वाबों में किसे दे कर इशारा आ गए

दोस्ती में खेल मतलब का नहीं खेला गया
सो इसी रिश्ते में हम ले कर ख़सारा आ गए

वो हमारा अक्स था हम से जुदा होता कहाँ
करके घर के आइनों से हम किनारा आ गए

उस ने इक इक लफ़्ज़ से सारा बदन छलनी किया
सोच कर उम्मीद का है दोष सारा आ गए

और फिर क्या हारने को इश्क़ में बाक़ी रहा
ख़ुद को जब पहली दफ़ा कर के तुम्हारा आ गए