उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dhowen mein uD gain sansen cigar KHatm hua

धोवें में उड़ गईं साँसें सिगार ख़त्म हुआ

دھویں میں اڑ گئیں سانسیں سگار ختم ہوا

शायर: Om Awasthi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

धोवें में उड़ गईं साँसें सिगार ख़त्म हुआ
इसी के साथ तिरा इंतिज़ार ख़त्म हुआ

बदन से कर के अलग रूह को जहाँ वाले
ये सोच लेते हैं दुनिया से प्यार ख़त्म हुआ

तुम्हारा हुस्न भी फीका पड़ा ऐ माह-जबीं
मिरा भी 'आशिक़ों में अब शुमार ख़त्म हुआ

किसी ने होंटों पे रख दी हैं उँगलियाँ अपनी
अब इस से आगे मिरा इख़्तियार ख़त्म हुआ