उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hunar ke sath agar hausle nikalte hain

हुनर के साथ अगर हौसले निकलते हैं

ہنر کے ساتھ اگر حوصلے نکلتے ہیں

शायर: Om Awasthi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हुनर के साथ अगर हौसले निकलते हैं
तो ख़ुद-बख़ुद ही नए रास्ते निकलते हैं

ज़ियादा दुख हो अगर आदमी के जीवन में
तो फिर ग़ज़ल में कई ज़ाविए निकलते हैं

दरख़्त सूखने वाले हैं पर ख़ुशी है उन्हें
कि नौनिहाल के सब फल पके निकलते हैं

हो अपना काम तो कुछ सूझता नही हम को
वगर्ना माँगे बिना मशवरे निकलते हैं

कि पहले प्यार को कितना भी कोई याद करे
इसी में सब से अधिक सानहे निकलते हैं