उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un se yun rabte nuzul paDe

उन से यूँ राब्ते नुज़ूल पड़े

ان سے یوں رابطے نزول پڑے

शायर: Nadeem Najid7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन से यूँ राब्ते नुज़ूल पड़े
राह में जा-ब-जा थे फूल पड़े

क्या कहा 'इश्क़ के सफ़र पे हो
गर ये सच है तो दोस्त तूल पड़े

जिस पे तस्वीर-ए-ज़िंदगी न लगे
ऐसी दीवार-ए-दिल पे धूल पड़े

मुनकिर-ए-ख़द्द-ओ-ख़ाल दिखते हो
जा तुझे आइना नुज़ूल पड़े

उस ने जूड़े में फूल टाँकना थे
और हम शाख़ शाख़ झूल पड़े

पाँव धरने की देर थी उस के
और फिर पानियों पे फूल पड़े

उस ने यूँही बस इक नज़र देखा
और हम थे कि राह भूल पड़े