उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ke sitam bhi kah nahin sakte kisi se hum

उन के सितम भी कह नहीं सकते किसी से हम

ان کے ستم بھی کہہ نہیں سکتے کسی سے ہم

शायर: Aal-e-Raza Raza3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन के सितम भी कह नहीं सकते किसी से हम
घुट घुट के मर रहे हैं अजब बेबसी से हम

यादश-ब-ख़ैर दिल का ख़याल आ के रह गया
इस बे-दिली में जीते हैं किस बे-हिसी से हम

जो दिल में था वो मिलता है साथ अपने ख़ाक में
तुम दूर और कह न सके कुछ किसी से हम