उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din hai bhaari gham-e-furqat ke giraftaron par

दिन है भारी ग़म-ए-फ़ुर्क़त के गिरफ़्तारों पर

دن ہے بھاری غم فرقت کے گرفتاروں پر

शायर: Aal-e-Raza Raza5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन है भारी ग़म-ए-फ़ुर्क़त के गिरफ़्तारों पर
रात कटती है दहकते हुए अंगारों पर

हुस्न वालों की ख़ुदाई है ख़ुदाई बरहम
किस को रहम आए मोहब्बत के गुनाह-गारों पर

फूँक दे बर्क़ नशेमन को चमक कर न डराए
आँखें अब रक्खी नहीं जाती हैं अंगारों पर

दिल की क़ीमत नहीं कोई कि यही एक है दिल
मैं ने ख़ुद छोड़ दिया मोल ख़रीदारों पर

आशिक़ी को जो गदाई से मिलाया न 'रज़ा'
तो रऊनत का भी इल्ज़ाम है ख़ुद्दारों पर