उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab hum ko kisi se koi shikwa na rahega

अब हम को किसी से कोई शिकवा न रहेगा

اب ہم کو کسی سے کوئی شکوہ نہ رہے گا

शायर: Aal-e-Raza Raza7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब हम को किसी से कोई शिकवा न रहेगा
जब तुम न रहे कोई हमारा न रहेगा

दुनिया में रहे सिलसिला-ए-हुस्न मुझे क्या
ऐ वक़्त मिरा अहद-ए-तमन्ना न रहेगा

शायद कोई हद सैल-ए-तमन्ना की हो लेकिन
धारा तो ये कहता है किनारा न रहेगा

बैठे थे घनी छाँव में इस की न ख़बर थी
बढ़ जाएगी धूप और ये साया न रहेगा

जब देख के ख़ुश होते थे क्या जानते थे हम
बढ़ जाएगी धूप और ये साया न रहेगा

जब देख के ख़ुश होते थे क्या जानते थे हम
रह जाएँगी आँखें ये तमाशा न रहेगा

समझा था न समझा है न समझेगा 'रज़ा' कुछ
दीवाना था दीवाना है दीवाना रहेगा