उर्दू शायरी · ग़ज़ल

allah nazar koi Thikana nahin aata

अल्लाह नज़र कोई ठिकाना नहीं आता

اللہ نظر کوئی ٹھکانہ نہیں آتا

शायर: Aal-e-Raza Raza4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अल्लाह नज़र कोई ठिकाना नहीं आता
आने को चले आते हैं जाना नहीं आता

कह दूँ तो मज़े पर ये फ़साना नहीं आता
ठहरूँ तो पलट कर ये ज़माना नहीं आता

यूँ रोज़ हुआ करते थे बे-साख़्ता चक्कर
अब आज बुलाया है तो जाना नहीं आता

तदबीर सी तदबीर दुआओं सी दुआएँ
सब आता है तक़दीर बनाना नहीं आता