उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek chah ki nigah ka afsana ban gaya

इक चाह की निगाह का अफ़्साना बन गया

اک چاہ کی نگاہ کا افسانہ بن گیا

शायर: Aal-e-Raza Raza6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इक चाह की निगाह का अफ़्साना बन गया
वो उँगलियाँ उठीं कि मैं दीवाना बन गया

अपने ही दिल की बात है अपने किए की लाज
का'बा बना रहा था मैं बुत-ख़ाना बन गया

अल्लह-रे बज़्म-ए-नाज़ तिरी ना-शनासियाँ
जिस को किया सलाम वो बेगाना बन गया

चुपके से उन का नाम लिया दिल से बात की
ये कौन सुन रहा था कि अफ़्साना बन गया

ख़ल्लाक़-ए-हुस्न-ओ-इश्क़ बड़ा दिल-नवाज़ है
तख़्लीक़-ए-शम्अ' होते ही परवाना बन गया

दुनिया के तख़्त-ओ-ताज 'रज़ा' ठोकरों पे हैं
क्या चीज़ अपना ठाठ फ़क़ीराना बन गया