उर्दू शायरी · ग़ज़ल

un ke lab aur sar-e-mahfil mera nam

उन के लब और सर-ए-महफ़िल मिरा नाम

ان کے لب اور سر محفل مرا نام

शायर: Jaleel Nomani Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

उन के लब और सर-ए-महफ़िल मिरा नाम
कब से बदला ये मोहब्बत का निज़ाम

ये हुआ अहल-ए-वफ़ा का अंजाम
क़िस्सा-ए-दार-ओ-रसन हो गया 'आम

हुस्न होता है सरापा हैरत
है मोहब्बत में इक ऐसा भी मक़ाम

कहाँ एहसान उठाने को दिमाग़
वर्ना ये लाला-ओ-गुल के पैग़ाम

ले तो आया हूँ मैं वा'इज़ को इधर
इस के अब आगे है साक़ी तिरा काम

यूँ शब-ओ-रोज़ गुज़रते हैं 'जलील'
रात को चैन न दिन को आराम