उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hasraten rah gain arman gae

हसरतें रह गईं अरमान गए

حسرتیں رہ گئیں ارمان گئے

शायर: Jaleel Nomani Rampuri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हसरतें रह गईं अरमान गए
निगह-ए-नाज़ तुझे जान गए

करम-ए-गर्दिश-ए-दौराँ की क़सम
अपने बेगाने को पहचान गए

वहीं इक हुस्न की तारीख़ बनी
जिस जगह 'इश्क़ के औसान गए

'आम थी दा’वत-ए-नज़्ज़ारा मगर
हम ने देखा तो बुरा मान गए

वही कहलाए गए दीवाने
जो तुम्हें थोड़ा बहुत जान गए

'उम्र-ए-रफ़्ता के ही हमराह 'जलील'
जिन पे था नाज़ वो सामान गए